Dharmasthala खुदाई में नया मोड़, शिकायतकर्ता को धमकी, जज ने केस से खुद को अलग किया

  Dharmasthala खुदाई में नया मोड़, शिकायतकर्ता को धमकी, जज ने केस से खुद को अलग किया,  सोमवार को भी धर्म स्थला में लाशों की तलाश के लिए खुदाई जारी रही। सोमवार को साइट नंबर 11 से करीब 100 मीटर की दूरी पर खुदाई का काम शुरू हुआ। लोकेशन में इस तब्दीली की गुजारिश खुद शिकायत्तकर्ता सफाई कर्मचारी ने एसआईटी से की थी और इसका नतीजा भी मिला

शिकायत्तकर्ता सफाई कर्मचारी ने एसआईटी से की थी और इसका नतीजा भी मिला


साइट नंबर 11 


की खुदाई के दौरान वहां से इंसानी कंकाल के कुछ अवशेष यानी हड्डियां और लाल रंग की फटी हुई साड़ी मिली। रविवार के एक दिन के ब्रेक के बाद सोमवार को धर्म स्थला में लाशों की पहेली का सच सामने लाने के लिए ठीक सुबह 11:30 बजे खुदाई का काम फिर से शुरू होता है। शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी ने जिन 13 जगहों की निशानानदेही की थी, उनमें से सोमवार को साइट नंबर 11 को खोदने की बारी थी। साइट नंबर एक से 10 तक की खुदाई शनिवार को ही पूरी हो चुकी थी


 साइट नंबर 11 नेत्रावती नदी


 से कुछ दूरी पर हाईवे के ठीक किनारे था। वक्त पर एसआईटी की टीम, फॉरेंसिक टीम, सीन ऑफ क्राइम ऑफिसर्स यानी सोको और मजदूर मौके पर पहुंच चुके थे।कि यह जगह सड़क किनारे थी। लिहाजा खुदाई के काम को पर्दे में रखने के लिए पहले पर्दे डाले गए। लेकिन इससे पहले कि तह जगह पर खुदाई शुरू होती मौके पर मौजूद नकाब में ढके शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी ने एसआईटी टीम से पहली बार एक गुजारिश की


 उसने कहा कि पहली किश्त में उसने जिन 13 जगहों की निशानदेही की है और उसकी निशानानदेही पर जहां-जहां टेप लगाए गए हैं, सिर्फ उस जगह की खुदाई ना करें बल्कि उसके आसपास के 100 मीटर के दायरे में भी खुदाई की जाए। क्योंकि काफी वर्ष बीत चुके हैं इसलिए तय लोकेशन को लेकर उससे थोड़ी बहुत गलती हो सकती है। इसी के बाद मौके पर ही उसने एसआईटी टीम से सड़क किनारे खुदाई करने की बजाय यहां से 100 मीटर अंदर जंगल में खुदाई करने की गुजारिश की। शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी की गुजारिश के बाद पूरी टीम हाईवे किनारे की इस जगह से अपना सामान समेट कर अब पहाड़ी की तरफ चढ़कर जंगल में दाखिल होने लगती है।


 साइट नंबर 11 से करीब 100 मीटर दूर 


खुदाई के दौरान सफाई कर्मचारी की निशानानदेही पर एसआईटी को दूसरी कामयाबी मिलती है। खुदाई के दौरान गड्ढे से फटी हुई लाल रंग की एक साड़ी और इंसानी कंकाल के कुछ अवशेष यानी हड्डियां मिलती हैं। इंसानी हड्डियां बरामद होने के कुछ देर बाद शायद फॉरेंसिक टीम के कहने पर जंगल के अंदर दो भरी हुई बोरियां भें गई। सूत्रों के मुताबिक इन बोरियों में नमक था। अमूमन एसआईटी की टीम अंधेरा होने से पहले खुदाई का काम बंद कर देती है। लेकिन सोमवार को देर शाम तक एसआईटी की टीम जंगल के अंदर थी। देर शाम खुदाई का काम पूरा होते ही अब अचानक जंगल के अंदर से एसआईटी की टीम, फॉरेंसिक टीम और मजदूर बाहर निकलना शुरू होते हैं। सभी के पास कुछ ना कुछ सामान था। कई बाल्टियां थी। पता नहीं उसके अंदर क्या कुछ था। सूत्रों के मुताबिक साइट नंबर 11 की खुदाई में ही लगभग पूरा दिन निकल गया। इसीलिए


 साइट नंबर 12 की खुदाई 

सोमवार को नहीं हो पाई। शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी ने पहली किश्त में इन 13 जगहों की निशानानदेही की है। उनमें से अब सिर्फ दो जगह बची है। आखिरी साइड 13 है। जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वहां मांस पर हुआ है। यानी सबसे ज्यादा लाशें वहीं दफनाई गई है। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी ने धर्म स्थला के आसपास 6 से 7 किमी के दायरे में ऐसी 50 जगहों की पहचान की है जहां लाशें दफनाई गई हैं। इनमें से छह से सात वो जगह है जहां मांस बरियल हुआ है। पहली किस्त में 13 जगह की खुदाई पूरी हो जाने के बाद बाकी जगहों की निशानानदेही कर एसआईटी अगले फेज में वहां की खुदाई करेगी। 


इस बीच पूरे मामले में एक नया ट्विस्ट भी आया है। शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी की वकील ने एसआईटी चीफ को एक लेटर लिखकर यह सनसनीखेज खुलासा किया है कि एसआईटी के ही एक अफसर ने अपनी शिकायत और केस वापस लेने के लिए 


शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी को धमकी दी है


क्योंकि शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी की पहचान और नाम गुप्त रखा गया है। लिहाजा उसे एक्स बुलाते हुए वकील अनन्या गौड ने लेटर में लिखा है कि एसआईटी के एक पुलिस अफसर मंजूनाथ गौड़ा ने 1 अगस्त की रात एक्स को एक बंद कमरे में धमकी दी और उससे कहा कि अगर वह केस वापस नहीं लेगा तो ना सिर्फ लंबे वक्त तक उसे जेल में रहना पड़ेगा बल्कि उसका अंजाम पूरा होगा। लेटर में आगे कहा गया है कि एक्स को यह धमकी उसी एसआईटी के टेंपरेरी कैंप में दी गई जहां एसआईटी की टीम और एक्स को रखा गया है। वकील का यह भी इल्जाम है कि मंजूनाथ गड़ा ने अपने मोबाइल पर जबरन एक्स का एक बयान भी रिकॉर्ड कर लिया है। एसआईटी चीफ से मांग की गई है कि वह एक्स को धमकाने वाले इस पुलिस अफसर को फौरन एसआईटी टीम से बाहर करें जो कि इससे जांच पर असर पड़ेगा। इस बीच शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी के सामने आने के बाद एक और नए गवाह ने सामने आकर एक नया खुलासा किया है। जयंत टी नाम के 

इस गवाह का दावा है कि करीब 15 साल


 पहले धर्मथला गांव में 13 से 15 साल की एक लड़की की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। लाश की हालत बेहद खराब थी। उन्होंने इसकी शिकायत तब पुलिस से भी की लेकिन ना पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर लिखी और ना ही लाश का पोस्टमार्टम करवाया बल्कि गैर कानानूनी तरीके से पुलिस की मौजूदगी में लाश को दफना दिया गया और इस कत्ल को छुपा लिया गया। सर नने अगस्त तारीख को एसआईटी तंड के व नुडते अ यार यार तालना या अधिकारी आदगा कानून चौकट माकोन उल्लंघने माड़ी ना मनोवा विषय न निष्ठावता अधिकारी तंड बंद ना दूर य वर्ष ना या स्टेटमेंट विषय अ विषय न दूर को यार यार होगी दूर को उ ना हो इ यार को इन को मैच ये तन नसी तनगा भीमा बंद भीमा ओके न प्रकारबेको नम्मा देश कानून न सर एसआईटी मा ओके सोमवार बन सोमवार एफ अ बॉडी माकोसी ये अरा अम्मा संदर्भ इन बरे इस गवाह का यह भी दावा है कि वो एसआईटी को वो जगह दिखा सकता है जहां उस लड़की की लाश दफनाई गई थी। गवाह का यह भी कहना है कि धर्म स्थला गांव में कई हत्याएं हुई


 लेकिन डर की वजह से कभी कोई सामने नहीं आता। उधर इस बीच एक और नई चीज हुई। निचली अदालत के जज विजय कुमार राय ने धर्म मिश्रा केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह वही जज विजय कुमार राय थे जिन्होंने धर्मरा में लाशों को लेकर खबरें दिखाने वाले 8842 खबरों के लिंक्स पर रोक लगा दी थी। जिस पर बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें फिर से गौर करने को कहा था। असल में एक जर्नलिस्ट ने धर्म स्थला से जुड़े केस की सुनवाई को लेकर जज विजय कुमार राय पर सवाल उठाया था। जर्नलिस्ट का कहना था कि जज साहब ने बेंगलुरु के जिस एसडीएम लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई की वो धर्म स्थला ट्रस्ट का ही कॉलेज है। इसके अलावा वकील रहने के दौरान विजय कुमार राय ने धर्म स्थला से जुड़े कई केसों की भी पैरवी की


 ऐसे में धर्म स्थला से जुड़े मामलों की उनके जरिए सुनवाई करना न्याय के लिए सही नहीं होगा। इसी के बाद विजय कुमार राय ने धर्म स्थला से जुड़े केस से खुद को अलग करने का फैसला कर लिया। हालांकि धर्म स्थला के इर्द-गिर्द दफन लाशों का मामला अदालत में तब पहुंचेगा जब पहले एसआईटी की जांच मुकम्मल हो जाएगी और यह जांच तब पूरी होगी जब शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी की बताई तमाम जगहों पर सारी खुदाई पूरी हो जाएगी। फिलहाल 29 जुलाई से शुरू हुई खुदाई कुछ इस अंदाज में आगे बढ़ रही है। मंगलवार 29 जुलाई को धर्म स्थला में नेत्रावती नदी के किनारे इस जगह पर पहली बार खुदाई शुरू होती है 


1995 से 2014 के Star अपने हाथों से


 धर्म स्थला के आसपास 5 से 6 कि.मी. के रेडियस में सैकड़ों लाशें दफनाने का दावा करने वाले नकाब में ढके सफाई कर्मचारी की निशानानदेही पर साइट नंबर एक पर पहली खुदाई शुरू हुई थी। इस सफाई कर्मचारी के बयान के बाद एसआईटी ने पहली किस्त में कुल 13 ऐसी जगहों की शिनाख्त की है। लेकिन 29 जुलाई यानी खुदाई के पहले दिन करीब 6 घंटे की मशक्कत और 15 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बावजूद कोई लाश, कंकाल या इंसानी हड्डियां नहीं मिली। पहले दिन की नाकामी के बाद एसआईटी ने दूसरे दिन साइट नंबर दो, तीन, चार और पांच की खुदाई का काम शुरू किया। 12 से लेकर 15 फीट तक गहरे गड्ढे खोदे गए


 लेकिन दूसरे दिन भी नाकामी ही हाथ लगी। एसआईटी को कोई लाश, कंकाल या इंसानी हड्डियां नहीं मिली। अलबत्ता साइट नंबर दो से खुदाई के दौरान 2ाई फीट की गहराई में लाल रंग का फटा हुआ एक ब्लाउज, एक पैन कार्ड और एक एटीएम कार्ड जरूर मिला। इनमें से एक कार्ड एक पुरुष का था। जबकि दूसरा लक्ष्मी नाम की महिला का। धर्मस्थ के करीब रहने वाली लक्ष्मी नाम की एक महिला की 2009 में मौत हो गई थी। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में कहीं उसका जिक्र नहीं है। क्या यह वही लक्ष्मी थी? फिलहाल यह आगे की जांच में ही पता चल पाएगा। साइट नंबर दो के अलावा तीन, चार और पांच से कुछ नहीं मिला। दो दिन बीत चुके थे। सफाई कर्मचारी के बताए पहली पांच जगहों पर खुदाई के बावजूद अब तक वहां दफन किसी लाश का कोई सबूत हाथ नहीं लगा था। 31 जुलाई गुरुवार की सुबह एसआईटी की टीम फिर से इसी नेत्रावदी नदी के किनारे पहुंचती है। शिकायत्तकर्ता सफाई कर्मचारी ने जिस छठी जगह या छठे साइट की निशानानदेही की थी वो यही जगह थी। तीसरे दिन भी एसआईटी की टीम, फॉरेंसिक टीम, मेडिकल टीम और मजदूरों के साथ साइट नंबर छह पर खुदाई शुरू कर दी है


 पहली पांच खुदाई में नाकामी हाथ लगने के बाद अब धीरे-धीरे शिकायत्तकर्ता सफाई कर्मचारी के दावे पर सवाल उठने शुरू हो चुके थे। और उन्हीं सवालों के बीच तीसरे दिन की खुदाई का काम शुरू होता है। रुक-रुक कर बारिश भी हो रही थी। बारिश की वजह से गड्ढे में पानी भी भरता जा रहा था। गड्ढे से पानी निकालने के लिए बाकायदा वाटर पंप का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। धीरे-धीरे गड्ढा गहरा होता जा रहा था और फिर तब पहले दो दिन की नाकामी के बाद तीसरे दिन पहली ही खुदाई में यानी साइट नंबर छह से अचानक कंकाल के कुछ अवशेष यानी इंसानी हड्डियां दिखाई देने लगती है। 


फौरन मजदूर अपना हाथ रोक देते हैं


 फावड़ा और दूसरे औजारों को किनारे रख दिया जाता है। मौके पर मौजूद फॉरेंसिक टीम पूरी हिफाजत के साथ अब उन हड्डियों को गड्ढे से बाहर निकालती है। असल में गीली मिट्टी और नेत्रावदी नदी के किनारे होने के चलते फॉरेंसिक टीम का यह मानना था कि अगर यहां से कंकाल के अवशेष या इंसानी हड्डियां मिलेंगी तो उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब होंगी। ऐसे में जेसीबी या दूसरी मशीनों से खुदाई के दौरान उन सबूतों के नष्ट हो जाने का खतरा था। फॉरेंसिक टीम की हिदायत पर जेसीबी या दूसरी मशीनों का इस्तेमाल ज्यादातर सिर्फ ऊपरी खुदाई के लिए ही किया जा रहा था


 फॉरेंसिक टीम की शुरू से यही कोशिश थी कि बेशक खुदाई में वक्त लगे लेकिन खुदाई छोटे-छोटे औजारों से मजदूर ही करें। लेकिन जैसे ही पहली बार कंकाल के अवशेष नजर आए मजदूरों के भी औजार के इस्तेमाल से रोक दिया गया। ताकि पहले से ही खराब हड्डियों को और नुकसान ना पहुंचे। इसके बाद फॉरेंसिक टीम की हिदायत पर मजदूर अपने हाथों से धीरे-धीरे आसपास की मिट्टी हटाने लगे। बाद में मौके से बरामद हड्डियों को फॉरेंसिक टीम अपने कब्जे में लेकर एक सुरक्षित बॉक्स में रख देती है। पहली पांच नाकामी के बाद आखिरकार शिकायत्तकर्ता सफाई कर्मचारी के दावे के मुताबिक छठी जगह यानी साइट नंबर छह से पहली बार सचमुच इंसानी कंकाल की शक्ल में चंद हड्डियां बाहर आ जाती हैं। कैमरामैन शिवमूर्ति के साथ सगे राज धर्म स्थला आज तक 



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